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PM Surakshit Matritva Abhiyan: सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 साल पूरे, मातृ मृत्यु दर में 86% की ऐतिहासिक कमी दर्ज

PM Surakshit Matritva Abhiyan: सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 साल पूरे, मातृ मृत्यु दर में 86% की ऐतिहासिक कमी दर्ज

 

नई दिल्ली। देश में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किए गए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) ने अपने 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री Jagat Prakash Nadda ने ‘पीएमएसएमए के 10 साल – देखभाल का एक दशक’ अभियान का शुभारंभ किया और 75 रुपये का स्मारक सिक्का तथा 5 रुपये का विशेष डाक टिकट जारी किया।

 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान ने देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के विजन के अनुरूप शुरू की गई इस पहल ने लाखों महिलाओं तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की है।

 

स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम रिपोर्ट में भारत ने मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। वर्ष 1990 के बाद से देश में मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की कमी आई है, जो वैश्विक औसत 48 प्रतिशत से कहीं अधिक बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है। इसके अलावा पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत और नवजात शिशु मृत्यु दर में 70 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

 

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) के आंकड़ों के अनुसार संस्थागत प्रसव की दर बढ़कर 90.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) कवरेज 95.9 प्रतिशत हो गया है। यह देश के स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती और जागरूकता अभियानों की सफलता को दर्शाता है।

 

कार्यक्रम में स्वास्थ्य सचिव Punya Salila Srivastava ने बताया कि पिछले दस वर्षों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 7.5 करोड़ से अधिक प्रसव पूर्व जांचें की गई हैं। इसके साथ ही लगभग 1.2 करोड़ उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय रहते पहचान कर आवश्यक उपचार और निगरानी सुनिश्चित की गई है।

 

उन्होंने कहा कि वर्तमान में देशभर में 9,000 से अधिक निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता इस अभियान से जुड़े हुए हैं। इससे विशेष रूप से दूरदराज और आकांक्षी जिलों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का लाभ मिल रहा है। इस पहल ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की खाई को कम करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

 

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 9 जून से देशभर में विशेष जागरूकता और आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य अधिक से अधिक गर्भवती महिलाओं को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत उपलब्ध नौ निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देना और उन्हें इन सुविधाओं का लाभ दिलाना है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित मातृत्व अभियान ने पिछले एक दशक में भारत की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा दी है। समय पर जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने जैसे कदमों ने लाखों माताओं और नवजात शिशुओं के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई है।

 

 

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