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DND Yamuna Link Road: DND-यमुना लिंक रोड परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, NHAI तैयार करेगा 31 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का खाका

DND Yamuna Link Road: DND-यमुना लिंक रोड परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, NHAI तैयार करेगा 31 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का खाका

नोएडा। दिल्ली और यमुना एक्सप्रेसवे के बीच निर्बाध और तेज कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रस्तावित DND-यमुना एक्सप्रेसवे लिंक रोड परियोजना को अब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) विकसित करेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए संशोधित डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। करीब 31.437 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के निर्माण से दिल्ली, नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के बीच यात्रा करने वाले लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक (जीएम) ए.के. अरोड़ा के अनुसार, NHAI ने प्रस्तावित एलाइनमेंट के आसपास मौजूद सभी प्रमुख सड़क परियोजनाओं का विस्तृत विवरण मांगा है। इसमें लिंक रोड, एक्सप्रेसवे, प्रस्तावित चिल्ला एलिवेटेड रोड तथा अन्य विकासाधीन परियोजनाओं की जानकारी शामिल है। साथ ही संबंधित मार्गों के डिजाइन, कनेक्टिविटी और एलाइनमेंट से जुड़े तकनीकी विवरण भी साझा किए जाएंगे, ताकि नई परियोजना को मौजूदा और प्रस्तावित सड़क नेटवर्क के साथ बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके। परियोजना के लिए नियुक्त सलाहकार कंपनी पूरे प्रस्तावित मार्ग का दोबारा सर्वेक्षण करेगी। इस सर्वेक्षण के दौरान भौगोलिक परिस्थितियों, यातायात की संभावनाओं और तकनीकी आवश्यकताओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर अंतिम DPR तैयार की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक DPR अगले दो महीनों के भीतर प्राप्त होने की संभावना है। इसके बाद परियोजना की वास्तविक लागत, अंतिम एलाइनमेंट और निर्माण मॉडल को मंजूरी दी जाएगी। फिलहाल इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 4,300 करोड़ रुपये आंकी गई है। परियोजना के सामने पर्यावरणीय चुनौतियां भी मौजूद हैं। प्रस्तावित लिंक रोड DND से घरबरा तक विकसित की जानी है, जिसका एक हिस्सा ओखला बर्ड सेंचुरी क्षेत्र के आसपास से होकर गुजरता है। इसी कारण इस क्षेत्र में दोबारा व्यवहार्यता (फिजिबिलिटी) अध्ययन कराया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पर्यावरणीय मंजूरियां प्राप्त करना इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती है। यदि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) या वन विभाग से आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) नहीं मिलता है, तो वैकल्पिक एलाइनमेंट पर विचार किया जा सकता है। योजना के अनुसार यह हाई-स्पीड कॉरिडोर सेक्टर-94 के पुश्ता क्षेत्र से शुरू होकर सेक्टर-151 के निकट यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। इस परियोजना के पूरा होने के बाद दिल्ली से आगरा, मथुरा, लखनऊ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों की ओर जाने वाले वाहनों को नोएडा शहर के अंदर प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे नोएडा एक्सप्रेसवे और शहर की प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा तथा यात्रियों को कम समय में अधिक सुगम और सुरक्षित यात्रा का लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना न केवल क्षेत्रीय यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाएगी, बल्कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी नई गति प्रदान करेगी। इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने की दिशा में यह परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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